Monday, February 22, 2021

राजस्थान में साल-दर-साल बढ़ रहे है सुसाइड के मामले


 राजस्थान में साल-दर-साल बढ़ रहे है सुसाइड के मामले

राज्य में वर्ष 2019 में 4531 लोगों ने स्वयं समाप्त किया अपना जीवन
5 वर्षो में आत्महत्या के कारण में 20 हज़ार से अधीक लोगों की हुई मौत

एनसीआरबी की ‘एक्सीडेंटल डेथस एंड सुसाइडस इन इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में वर्ष 2018 के मुकाबले वर्ष 2019 में आत्महत्याओं के मामलों में 4.56 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी है । रिपोर्ट के अनुसार राज्य में जहाँ वर्ष 2018 में 4333 लोगों ने अपना जीवन स्वयं समाप्त कर लिया वहीँ वर्ष 2019 में यह संख्या बढ़कर 4531 हो गयी । प्रदेश में मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था एसआरकेपीएस के जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ भूपेश दीक्षित ने बताया कि राजस्थान सरकार की ‘क्राइम इन राजस्थान’ रिपोर्ट का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि प्रदेश में साल-दर-साल ख़ुदकुशी के मामले बढ़ रहे है । 


राज्य में वर्ष 2015 के मुकाबले वर्ष 2019 में ख़ुदकुशी के मामलों में 31 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने में आई है । दीक्षित ने बताया कि प्रदेश में बीते कुछ सालों में सामूहिक/पारिवारिक आत्महत्या के मामले भी बढ़ रहे है । प्रदेश में सामूहिक/पारिवारिक आत्महत्याओं के 7 मामलों में कुल 22 लोगों ने अपनी जान गवाई है ।  दीक्षित ने बताया कि पारिवारिक समस्याएं, झगड़े, लम्बी बीमारियों से होने वाली शारीरिक व मानसिक परेशानियां, डिप्रेशन, कर्जा, दिवालियापन, वैवाहिक जीवन में कलेश व बेरोजगारी आत्महत्या के प्रमुख कारण बन कर उभर रहे है । निसंदेह ये आंकड़ें व हालात सरकार और समाज दोनों को चेताने वाले है । उन्होंने बताया कि प्रदेश में आत्महत्या एक जनस्वास्थ्य, सामाजिक एवं आर्थिक समस्या बनकर उभर चुकी है जिसपर सरकार को तुरंत ध्यान देते हुए लोकस्वास्थ्य के हित में ‘राजस्थान राज्य आत्महत्या रोकथाम नीति’ की कार्ययोजना शीघ्र बनाते हुए प्रदेश में लागू करने की आवश्यकता है  ।  

वर्ष

राजस्थान में वर्षवार आत्महत्या के आंकड़े

(स्रोत – राजस्थान स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो )

2015

3457

2016

3678

2017

4188

2018

4333

2019

4531

कुल

20187

 


बार-बार आत्महत्या के ख्याल आते हैं? जानिए इससे बचने के तरीके


चाहें आप कितना भी दर्द महसूस कर रहे हों, आप अकेले नहीं हैं। दर्द का इलाज किया जा सकता है और आशा को एक नई दिशा दी जा सकती है। कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपकी स्थिति क्या है। दुनिया में ऐसे लोग हैं जिन्हें आपकी जरूरत है, ऐसी जगहें जहां आप अच्छा महसूस कर सकते हैं। आपके साथ जरूर कुछ ऐसे यादगार अनुभव होंगे, जो आपको याद दिला सकते हैं कि जीवन कितना अच्छा है।मौत का सामना करने के लिए असली हिम्मत चाहिए। आप अपनी इसी हिम्मत और साहस का उपयोग जीवन की कठनाइयों का सामना करने के लिए कीजिए। अवसाद पर काबू पाने और अपने कौशल को जानने के लिए कीजिए।


याद रखिए

भावनाएं निश्चित नहीं हैं, वे लगातार बदलती रहती हैं। आप आज जैसा महसूस कर रहे हैं, वैसा कल महसूस नहीं किया था कल या अगले सप्ताह आपको कुछ और महसूस हो रहा होगा। इसलिए अपनी भावनाओं पर कंट्रोल करना बेहद जरूरी है।

आपकी अनुपस्थिति मित्रों और प्रियजनों के जीवन में दुख और पीड़ा पैदा करती है। जब भी दिमाग पर नकारात्मक बातें हावी हो और आपको लगे कि आपका जीवन व्यर्थ है तो आप यह सोचें कि कितने लोग हैं जिन्हें आपसे लगाव हैं। उनकी जिंदगी में आपकी अनुपस्थिति से कितना दुख होगा।

कई चीजें हैं, जो आप अभी भी अपने जीवन में पूरा कर सकते हैं। कभी भी ऐसा लगे कि आपके पास जीवन में करने के लिए कुछ नहीं है तो यह सोचें कि जिन चीजों को आप करना चाहते थे। छोटी-छोटी चीजों में खुशियां ढूंढें। हर वो काम करें जिससे आपको खुशी मिले।

जीवन में ढेर सारी जगहें, अनुभव हैं, जो आपको खुश करने की क्षमता रखते हैं। आपको इन चीजों से खुद को जोड़े रखना होगा। जब भी दिमाग में नकारात्मकता हावी हो तो उन सभी पलों के बारे में सोचें जिनमें आपको खुशी मिली हो।

आत्महत्या करना एक अपराध माना जाता हैं, इसका ख्याल आना एक दोष नहीं हैं। यह एक तरह की मानसिक समस्या है, क्योंकि इस टाइम आप दर्द में होते हैं। आप यह न समझें कि यह दर्द कभी खत्म नहीं हो सकता, इस समस्या से निकलने के लिए हमेशा अपने घरवालों के साथ रहें और ज्यादा से ज्यादा समय उन्हीं के साथ बिताएं। ऐसा करना आपको मानसिक तनाव से भी दूर रखता है।

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