Friday, August 30, 2019

मामूली चीरे से ब्रेस्ट कैंसर में बच सकेगा अंग - अब 40 की उम्र में ही हो रहा है ब्रेस्ट कैंसर

(हर तीन मिनट में एक नया ब्रेस्ट कैंसर की मरीज सामने आती है और हर 13 मिनट में एक मृत्यु )


जयपुर। लाइफ स्टाइल और हार्मोनल बदलावों से अब कम उम्र में ही ब्रेस्ट कैंसर हो रहा है। 40 की उम्र में ही महिलाएं इस खतरनाक रोग से पीडि़त होने लगी हैं। हालत यह है कि हर तीन मिनट में एक नया ब्रेस्ट कैंसर की मरीज सामने आती है और हर 13 मिनट में एक मृत्यु हो जाती है। ब्रेस्ट कैंसर की इस भयावह स्थिति से निपटने और इलाज की नई तकनीकों पर मंथन के लिए देश-विदेश से डॉक्टर्स शुक्रवार से जयपुर में जुटे हैं।

एसोसिएशन ऑफ ब्रेस्ट सर्जन इंडिया, सीतादेवी हॉस्पिटल व एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्लास्टिक सर्जरी विभाग की ओर से शुक्रवार से यहां होटल ललित में तीन दिवसीय कॉन्फ्रेंस शुरू हुई। कांफ्रेंस के आयोजन सचिव डॉ. उत्तम सोनी ने बताया कि ब्रेस्ट कैंसर के इलाज की नई तकनीकों पर पहले दिन पांच सत्रों में अलग-अलग विषयों पर चर्चा की गई। कॉन्फ्रेंस में 450 से अधिक ब्रेस्ट सर्जन्स, प्लास्टिक सर्जन्स, ऑन्कोलॉजिस्ट भाग ले रहे हैं। इस दौरान ब्रेस्ट कैंसर की मिनिमल इनवेंसिव सर्जरी, ऑन्कोप्लास्टी सर्जरी, रीकंस्ट्रक्शन सर्जरी, नई कीमोथैरेपी आदि पर चर्चा की गई। कॉन्फ्रेंस के आयोजन अध्यक्ष व एसएमएस अस्पताल के डॉ. प्रदीप गोयल ने आरंभ में आयोजन की जानकारी दी तथा सभी का आभार व्यक्त किया।

निकले अंग का होगा पुर्ननिर्माण --

इंग्लैंड के डॉ. ऋषिकेश परमेश्वर व डॉ. शंकर नारायणन ने बताया कि कैंसर होने के बाद यदि ब्रेस्ट को निकाला जाता है तो अब घबराने की जरूरत नहीं है। नई तकनीक से इसका पुर्ननिर्माण हो सकता है। इसके लिए शरीर के दूसरे हिस्सों से टिश्यू लेकर ब्रेस्ट की जगह ट्रांसफर कर नया अंग बना दिया जाता है। इस तरह मरीज का सौंदर्य भी बरकरार रहता है और उसे सामाजिक और मानसिक परेशानियों का भी सामना नहीं करना पड़ता है।

खून की जेनेटिक जांच से भी पता चलता है कैंसर --

कॉन्फ्रेंस में यूके के डॉ. हिशाम हमीद ने बताया कि कई बार जेनेटिक कारणों से भी ब्रेस्ट कैंसर हो जाता है जिसे मामली खून की जेनेटिक जांच से भी पता किया जा सकता है। समय रहते इलाज शुरू हो जाए तो मरीज को कैंसर से बचाया जा सकता है। वहीं लंदन के डॉ. जॉन रॉबर्टसन ने बताया कि अब ऐसी सर्जरी आ गई हैं जिसमें कैंसर युक्त ब्रेस्ट को निकालने की बजाय सिर्फ ट्यूमर को निकाल कर इलाज कर दिया जाता है। इसमें पूरे ब्रेस्ट निकालने की बजाय सिर्फ कैंसर प्रभावित ट्यूमर को दूरबीन सर्जरी से निकाल दिया जाता है। इस तरह ब्रेस्ट की शेप में भी कोई फर्क नहीं पड़ता। आयोजन सचिव डॉ. उत्तम सोनी ने बताया कि कॉन्फ्रेंस में दिल्ली की डॉ. के. गीता, यूके से डॉ. आशुतोष कोठारी व डॉ. सीमा सीतारमण, अहमदाबाद के डॉ. डीजी विजय, बेंगलुरू के डॉ. अशोक बीसी, जयपुर के डॉ. कपिलदेव ने भी विभिन्न सत्रों में ब्रेस्ट कैंसर से जुड़ी नई इलाज तकनीकों की जानकारी दी।


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