Sunday, March 20, 2022

इंटरनेट गेमिंग डिसऑर्डर:एक उभरती चुनौती- डॉ अखिलेश जैन


इंटरनेट गेमिंग डिसऑर्डर:एक उभरती चुनौती


इंटरनेट हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग बन चुका है। यह व्यवसाय, शिक्षा, संचार, मनोरंजन, सामाजिक मेलजोल, सूचनाओं के आदान प्रदान आदि सहित जीवन के हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इंटरनेट का योगदान स्पष्ट रूप से कोविड 19 महामारी के दौरान अनुभव किया गया जब यह शिक्षा, व्यवसाय और संचार जैसी  आवश्यकताओं को पूरा करने का एकमात्र माध्यम बना।  महामारी के दौरान टेलीमेडिसिन में इंटरनेट की भूमिका और लॉकडाउन अवधि के दौरान शिक्षा में इसके स्तेमाल ने नए विकल्प  स्थापित किए।

हालांकि किशोरावस्था में इंटरनेट तक  अत्यधिक पहुंच के कारण पिछले कुछ समय में इंटरनेट गेमिंग के कारण हुई घटनाएं पेरेंट्स और समाज के लिए चुनोती बनकर उभरी हैं।गेमिंग के हानिकारक प्रभावों को ध्यान में रखते हुए यह समझना प्रासंगिक हो जाता है कि इंटरनेट गेमिंग डिसऑर्डर क्या है?

गेमिंग डिसऑर्डर को एक एडिक्टिव बिहैवियर के रूप में समझा जा सकता है जिसमें लगातार या बार बार गेम खेलने का पैटर्न बना रहता है।

 

कई प्रस्तावित लक्षण यह पहचानना आसान बनाते हैं कि किसी व्यक्ति को गेमिंग डिसऑर्डर हो सकता है। 


 *लक्षण* 


अधिकांश समय गेमिंग के बारे में सोचना


ना खेल सकने पर व्यवहार में चिड़चिड़ापन, बैचैनी, गुस्सा इत्यादि होना


धीरे धीरे गेमिंग का समय निर्धारित सीमा से आगे बढ़ते जाना


गेमिंग छोड़ने के प्रयासों में असफल होना


अन्य रुचिकर कार्यों एवम गतिविधियों में मन ना लगना


गेमिंग के कारण स्कूल,घर एवम अन्य कार्यों पर नकारात्मक प्रभाव


इन प्रभावों के बावजूद गेमिंग में व्यस्त रहना


गेमिंग को लेकर परिजनों एवम अन्य से झूठ बोलना


गेमिंग व्यवहार को खराब मूड से राहत के विकल्प के रूप में देखना


 *किन में ज्यादा संभावनाएं* 


स्टडीज बताती हैं कि जिन बच्चों में हाइपर एक्टिविटी,इम्पलसिविटी,रोमांच के प्रति लगाव या भावनात्मक समस्याएं होती हैं तथा जहां पारिवारिक समस्याएं ज्यादा होती हैं,गेमिंग डिसऑर्डर की संभावना अधिक रहती है।


 *गेम में बने रहने के संभावित मनोवैज्ञानिक कारण* 


मनोवैज्ञानिक रूप से बच्चे गेम में इनाम और अपनी पहचान को महत्व देने लगते हैं तथा अपने आप को सोशली जुड़ा महसूस करते हुए आत्मसम्मान का अहसास करते हैं।चूँकि यह एक आभासी दुनिया है जहाँ माता पिता या बड़ों का कोई नियंत्रण ना होने से बच्चे स्वतंत्र तथा एक प्रकार से स्वंय का पूरा कन्ट्रोल महसूस करते हैं।


 *गेमिंग के कारण होने वाली समस्याएं* 


इन बच्चों को ध्यान और एकाग्रता की समस्या के साथ साथ शिक्षा और सामाजिक संबंधों में समस्या हो सकती है, नींद की समस्या, अनियमित भोजन की आदतें, मनोवैज्ञानिक समस्या जैसे अवसाद और चिंता, शारीरिक समस्याएं आदि हो सकती हैं।


 *क्या किया जा सकता है* 


परिवार में सकारात्मक एवम पर्याप्त संवाद का होना


बच्चों की भावनाओं का संज्ञान एवम उचित सलाह

 

माता-पिता का बच्चों के साथ कुछ रचनात्मक समय 


बच्चों को आउटडोर गेम्स के लिए करें प्रोत्साहित


बच्चों को स्वस्थ खान-पान और सोने की आदतें सिखाई जानी चाहिए


बच्चों के साथ इंटरनेट गेमिंग के नुकसान के बारे में चर्चा 


किसी ना किसी रूप में गेम के दौरान पैरेंट का कंट्रोल सुनिश्चित करना


पेरेंट्स स्वंय बच्चों के सामने गैजेट का ज्यादा स्तेमाल ना कर उदाहरण पेश कर सकते हैं


बच्चे के व्यवहार में परिवर्तन जैसे देर रात जागना ,दिन में अत्यधिक सोना,चिड़चिड़ा या गुस्सैल स्वभाव,अलग अलग रहना,एकेडेमिक्स और सोशल व्यवहार में अचानक गिरावट आना इत्यादि को संज्ञान में लायें ।


जरूरत पड़ने पर थेरेपिस्ट से सलाह करें।



डॉ अखिलेश जैन

मनोरोग विभागाध्यक्ष

ईएसआई मॉडल हॉस्पिटल

जयपुर

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