आज से प्रदेश में ठप्प हुई ''जीवनवाहिनी''
प्रदेशभर में एम्बुलेंस सेवाएं ठप्प
वेतन विसंगितियों सहित अन्य मांगों को लेकर एम्बुलेंस कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर
सरकार से हुई बातचीत तो ही टूट सकती है हड़ताल
प्रदेशभर में 1500 एम्बुलेंस के थम गये पहिए
राजस्थान में जीवनवाहिनी के पहिये पूरी तरह थम चुके है ..हम बात कर रहे है आपातकाल सेवा से जुड़ी एम्बुलेंस गाड़ियों की ..जिनके कर्मचारी अपनी 7 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकाल के लिए हड़ताल पर चले गये है .. दरअसल कर्मचारियों का कहना है कि हाल ही में राज्य सरकार की ओर से जारी नई निविदा में वर्तमान में सेवारत एम्बुलेंस कर्मचारियों के लिए कोई भी प्रावधान नहीं रखा गया है. ऐसे में एम्बुलेंस कर्मचारियों के बेरोजगार होने का अंदेशा खड़ा हो गया है.
इंटीग्रेटेड एम्बुलेंस सेवा के लिए आरएएस स्तर का एक रिसीवर नियुक्त किया जाए ताकि कोई भी एम्बुलेंस सेवा प्रदाता कंपनी एम्बुलेंस कर्मचारियों का शोषण ना कर सके. नई निविदा में एम्बुलेंस कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने और प्रतिवर्ष 10 फीसदी वेतन वृद्धि का प्रावधान करने की भी मांग रखी गई है.प्रदेशाध्यक्ष शेखावत ने मांग करते हुए कहा कि जिस भी स्थान पर एम्बुलेंस रखी जाती है वहां कर्मचारियों के रहने कमरे, बाथरूम और मूलभूत सेवाएं मुहैया करवाई जाए. प्रदेश में जब-जब एम्बुलेंस कर्मचारी यूनियन ने हड़ताल की तब-तब मरीजों की जान पर बन आई है.
प्रदेशभर में फैली ये एम्बुलेंस सेवाएं मेडिकल सर्विस की अहम कड़ी है. एम्बुलेंस की हड़ताल के कारण दूर दराज के लोगों को मरीजों को अस्पताल लाने के लिए साधन तक नहीं मिलते हैं. अगर मिलते भी हैं तो उनके मुंहमांगे किराए पीड़ितों की कमर तोड़कर रख देते हैं. वहीं दुर्घटना के मामलों में तो कई पीड़ित अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं.

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